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दादाराव परमार्थ

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 बात एक अगस्त, 1920 की है। लोकमान्य तिलक के देहान्त के कारण पूरा देश शोक में डूबा था। संघ  के संस्थापक डॉ. हेडगेवार जी किसी कार्य से घर से निकले। उन्होंने देखा कुछ लड़के सड़क पर गेंद खेल रहे हैं। डॉ. जी क्रोध में उबल पड़े – तिलक जी जैसे महान  नेता का देहान्त हो गया और तुम्हें खेल सूझ रहा है। सब बच्चे सहम गये। इन्हीं में एक थे गोविन्द सीताराम परमार्थ, जो आगे चलकर दादाराव परमार्थ के नाम से प्रसिद्ध हुए। दादाराव का जन्म नागपुर के इतवारी मोहल्ले में 1904 में हुआ था। उनके पिता डाक विभाग में काम करते थे। दादाराव को मां के प्यार के बदले सौतेली मां की उपेक्षा ही अधिक मिली क्योंकि जब दादाराव की आयु केवल चार वर्ष थी । उनकी मां का देहान्त हो गया जिसके कारण उनके पिताजी ने दूसरा विवाह कर लिया। था  मैट्रिक में पढ़ते समय इनका सम्पर्क क्रान्तिकारियों से हो गया। साइमन कमीशन के विरुद्ध आन्दोलन के समय पुलिस इन्हें पकड़ने आयी, पर ये फरार हो गये। पिताजी ने इन्हें परीक्षा देने के लिए पंजाब भेजा, उन्होने परीक्षा में उत्तर पुस्तिका को अंग्रेजों की आलोचना से भर दी। ऐसे में परिणाम क्या होना थ...

महान योद्धा तक्षक

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 महान योद्धा तक्षक का नाम कभी किसी विद्वानों ने आपको बताया ? *जिहाद का इलाज* *सन 711ई. की बात है। अरब के पहले मुस्लिम आक्रमणकारी मुहम्मद बिन कासिम के आतंकवादियों ने मुल्तान विजय के बाद  एक विशेष सम्प्रदाय हिन्दू के ऊपर गांवों, शहरों में भीषण रक्तपात मचाया था। हजारों स्त्रियों की छातियाँ नोच डाली गयीं । इस कारण अपनी लाज बचाने के लिए हजारों सनातनी किशोरियां अपनी शील की रक्षा के लिए कुंए- तालाब में डूब मरीं ।लगभग सभी युवाओं को या तो मार डाला गया या गुलाम बना लिया गया । भारतीय सैनिकों ने ऎसी बर्बरता पहली बार देखी थी !* एक बालक तक्षक के पिता, कासिम की सेना के साथ हुए युद्ध में वीरगति को प्राप्त हो चुके थे। लुटेरी अरब सेना जब तक्षक के गांव में पहुंची तो हाहाकार मच गया । स्त्रियों को घरों से खींच खींच कर उनकी देह लूटी जाने लगी । भय से आक्रांत तक्षक के घर में भी सब चिल्ला उठे। तक्षक और उसकी दो बहनें भय से कांप उठी थीं ।  तक्षक की माँ पूरी परिस्थिति समझ चुकी थी ! उसने कुछ देर तक अपने बच्चों को देखा और जैसे एक निर्णय पर पहुंच गयी।  माँ ने अपने तीनों बच्चों को खींच कर छाती में ...

पंचकन्याओं का रहस्य

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 पंचकन्याओं का रहस्य पुराणानुसार ये पाँच स्त्रियाँ जो विवाहिता होने पर भी कन्याओं के समान ही पवित्र मानी गई है। अहल्या, द्रौपदी, कुन्ती, तारा और मंदोदरी हिन्दू धर्म से जुड़ी पौराणिक कथाओं में ज्यादातर प्रसिद्ध पात्र पुरुषों के ही हैं। पुरुषों को ही महायोद्धा, अवतार आदि का दर्जा दिया गया और उन्हीं से जुड़े चमत्कारों का भी वर्णन हुआ। लेकिन उनके जीवन से जुड़ी महिलाएं, जिनके बिना उनका अपने उद्देश्यों को प्राप्त करना तक मुश्किल था, उन्हें मात्र एक भूमिका में लाकर छोड़ दिया गया। पौराणिक स्त्रियां यही वजह है कि मंदोदरी को असुर सम्राट रावण की अर्धांगिनी के तौर तारा को वाली की पत्नी के तौर पर, अहिल्या को गौतम ऋषि की पत्नी के रूप में, कुंती और द्रौपदी को पांडवों की माता और पत्नी के रूप में ही जाना जाता है। पंचकन्या हिन्दू धर्म में इन पांचों स्त्रियों को पंचकन्याओं का दर्जा दिया गया है। जिस स्वरूप में हम अपने पौराणिक इतिहास को देखते हैं, उसे विशिष्ट स्वरूप को गढ़ने का श्रेय इन स्त्रियों को देना शायद अतिश्योक्ति नहीं कहा जाएगा। पंचकन्याओं का जीवन मंदोदरी, अहिल्या और तारा का संबंध रामायण काल से है, ...

POK गिलगित बाल्टिस्तान के भारतीय क्षेत्र को खाली करने की सूचना.....

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 POK गिलगित बाल्टिस्तान के भारतीय क्षेत्र को खाली करने की सूचना..... भारत सरकार ने आधिकारिक रुप से POK गिलगित बाल्टिस्तान के भारतीय क्षेत्र को खाली करने की सूचना पाकिस्तान सरकार को दे दी है । तो आइए pok क्षेत्र के विषय में अपनी जानकारी बढ़ाएं, क्योंकि अब हम सभी देशवासियों को संपूर्ण जम्मू कश्मीर के इतिहास और भूगोल की सत्यता के बारे में बा तचीत करने की जरूरत है विशेषकर POK और अक्साई चीन (cok) के बारे में । गिलगित जो अभी POK के रुप में है वह विश्व में एकमात्र ऐसा स्थान है जो कि 5 देशों की सीमा से जुड़ा हुआ है , अफगानिस्तान, तजाकिस्तान (जो कभी Russia का हिस्सा था), पाकिस्तान, भारत और तिब्बत-चाइना । "वास्तव में जम्मू कश्मीर का महत्व जम्मू के कारण नहीं, कश्मीर के कारण नहीं, लद्दाख के कारण नहीं वास्तव में अगर इसका महत्व है तो वह है गिलगित-बाल्टिस्तान के कारण (pok) अब तक ज्ञात इतिहास में भारत पर जितने भी आक्रमण हुए यूनानियों से लेकर आज तक (शक , हूण, कुषाण , मुग़ल ) वह सारे गिलगित मार्ग से ही हुए । हमारे पूर्वज जम्मू-कश्मीर के महत्व को समझते थे उनको पता था कि अगर भारत को सुरक्षित रखना है तो...

नारी

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 नारी..... ईश्वर की बनाई खूबसूरत रचना... जब मैंने जन्म लिया,वहां "एक नारी" थी जिसने मुझे थाम लिया......                                 !! मेरी माँ !! बचपन में जैसे जैसे मैं बड़ा होता गया "एक नारी" वहां मेरा ध्यान रखने और मेरे साथ खेलने के लिए मौजूद थी.....                   !! मेरी बहन !! जब मैं स्कूल गया "एक नारी" ने मुझे पढ़ने और सिखाने में मदद की......                 !! मेरी शिक्षिका !! जब भी मै जीवन से निराश और हताश हुआ और जब भी हारा तब "एक नारी" ने मुझे संभाला ...               !! मेरी महिला मित्र !! जब मुझे सहयोग,साथी और प्रेम की आवश्यकता हुई तब "एक नारी" हमेशा मेरे साथ थी.....               !! मेरी पत्नी !! जब भी मैं जीवन में कठोर हुआ तब "एक नारी" ने मेरे व्यवहार को नरम कर दिया.....               !! मेरी बेटी ...

तालिबान राज में किस तरह किया जाता था सेक्स? अफगानिस्तान की इकलौती एडल्ट स्टार ने किया खुलासा

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  तालिबान राज में किस तरह किया जाता था सेक्स? अफगानिस्तान की इकलौती एडल्ट स्टार ने किया खुलासा  तालिबान राज में किस तरह किया जाता था सेक्स? अफगानिस्तान की इकलौती एडल्ट स्टार ने किया खुलासा अफगानिस्तान की इकलौती और प्रसिद्ध पॉर्न स्टार यासमीना अली ने तालिबान राज को लेकर कई सनसनीखेज खुलासे किए हैं। तालिबान के पहले शासनकाल के दौरान कुछ सालों की रही यासमीना अली ने खुलासा किया है, कि कैसे तालिबान खुद को उसके शरीर का मालिक समझते हैं। एक वक्त तालिबान के डर से खौफजदा रहने वाली यासमीना अली के तालिबान पर खुलासे रोंगटे खड़े करने वाले हैं। छोटी उम्र में देखा तालिबान का जुल्म प्रसिद्ध पॉर्नस्टार के तौर पर मशहूर यासमीना अली ने ब्रिटिश अखबार डेली स्टार से बात की है और तालिबान राज से लेकर अपनी जिंदगी के बारे में कई बड़े खुलासे किए हैं। 1990 के दशक में जब पहली बार तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा किया था, फस वक्त यासमीना अली एक छोटी और बेघर बच्ची थी, जो काबुल की सड़कों से तालिबान के खौफ की गवाह बन रही थी। यासमीना अली ने अपनी आंखों के सामने तालिबान के लोगों को पुरुषों और महिलाओं पर भीषण जुल्म कर...