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जापान में जब ये पेड़ उगा, तब भारत के पश्चिमी तट पर वास्कोडिगामा अपने शिप से उतर रहा था।

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 जापान में जब ये पेड़ उगा, तब भारत के पश्चिमी तट पर वास्कोडिगामा अपने शिप से उतर रहा था।  इस पेड़ ने साम्राज्यवाद देखा, क्रांतियां देखी, राजाओं को मिटते देखा, जनतंत्र का उभार देखा। देशों को बनते देखा, खत्म होते भी देखा।  कला देखी, तो क्रूरता का भी गवाह हुआ, विज्ञान को अंधकार से चांद की सतह तक पहुँचते देखा।  ●● 400 साल में यह बोनसाई, महज चार इंच बढ़ा। ये हरा भरा है, एकदम असल है। फूल भी आते हैं, सुंदर है, 50 हजार डॉलर का सबसे महंगा पौधा है। पर सच यही है, कि ये बोनसाई है,  याने बौना है, किसी के रहमोकरम पर है।  बोनसाई, नॉर्मल नही होता। इसे मिट्टी की थिन लेयर दी जाती है, कंट्रोल्ड पानी दिया जाता है। तारो के छल्ले से इसका विकास रोका जाता है।  अनचाही शाखें काट दी जाती हैं।  ●● बोनसाई किसी भी पौधे को बनाया जा सकता है, बशर्ते आप उसकी नैचुरल ग्रोथ का पूरा पैटर्न समझ चुके हों।   इसी तरह बोनसाई किसी समाज को, किसी व्यवस्था को, किसी देश को, उसके लोगो को भी बनाया जा सकता है।  आपको बस, शिक्षा की सीमित मिट्टी देनी है, सीमित बौद्धिक स्वतंत्रता देनी है। ...

पाइरेट्स ऑफ कैरिबियन...

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 पाइरेट्स ऑफ कैरिबियन...  मूवी याद होगी आपको, और जॉनी डेप्प का मशहूर किरदार कैप्टन जैक स्पैरो भी। आप इन पाइरेट्स को क्रिमिनल, लुटेरा और आउटलॉ मानते रहे हैं।  पर सच्चाइयां अक्सर उलट होती है।  ●● मैं बकेनियर्स की बात कर रहा हूँ। याने, "सरकारी डाकू" जिन्हें राजा की ओर से, लूट का लाइसेंस मिला होता था।  ये सोलहवीं सदी का दौर था। समुद्र, तब का नया इंटरनेट था। हाई सीज, व्यापार का हाइवे बन रहे थे। नौकायन, जहाजरानी, नेविगेशन में नई खोजें हो रही थी।  नई जमीन नए देश,नए जलमार्ग खोजे जा रहे थे। उनसे व्यापार किया जा रहा था। जहाजो में भरा माल, कमाए गए सिक्के, उनमें चप्पू चला रहे गुलाम.. ये सब मिलकर किसी भी व्यापारिक शिप को, "तैरता हुआ बटुआ" बना देते थे।  तो समुद्र में तैरता बटुआ लूटकर रातोरात अमीर होने के इच्छुक भी थे।  ●●● लेकिन समुद्री लुटेरा होना आसान न था। हाई स्किल, हाई रिसोर्स, हाई इन्वेस्टमेंट का काम था। इसके ऊपर सबसे बड़ी जरूरत थी, एक देश की, जहां आप लूट की अकूत दौलत खर्च कर पायें। बंगले बनायें, ऐश करें, बाइज्जत आजाद घूम सकें।  तो पहले तो कुछ जियाले ...