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#BETI #PITA ... #Daughter #Father #Papa

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 #BETI  #PITA ...  #Daughter   #Father   #Papa               घर से भागी हुई बेटियों का पिता इस दुनिया का सबसे अधिक टूटा हुआ व्यक्ति होता है, पहले तो वो महीनों तक घर से निकलता ही नही और फिर जब निकलता है तो हमेशा सिर झुका कर चलता है, आस पास के मुस्कुराते चेहरों को देख उसे लगता है जैसे लोग उसी को देख कर हँस रहे हों, जीवन भर किसी से तेज स्वर में बात नहीं करता, डरता है कहीं कोई उसकी भागी हुई बेटी का नाम न ले ले, जीवन भर डरा रहता है, अंतिम सांस तक घुट घुट के जीता है, और अंदर ही अंदर रोता रहता है। जानते हैं भारतीय समाज अपनी बेटियों को लेकर इतना संवेदन शील क्यों है, भारतीय इतिहास में हर्षवर्धन के बाद तक अर्थात सातवीं आठवीं शताब्दी तक बसन्तोत्सव मनाए जाने के प्रमाण मौजूद हैं, बसन्तोत्सव बसन्त के दिनों में एक महीने का उत्सव था जिसमें विवाह योग्य युवक युवतियाँ अपनी इच्छा से जीवनसाथी चुनती थीं और समाज उसे पूरी प्रतिष्ठा के साथ मान्यता देता था,  आश्चर्यजनक है ना आज उसी देश में कुछ गांवों की पंचायतें जो प्रेम करने पर कथित रूप ...

जापान में जब ये पेड़ उगा, तब भारत के पश्चिमी तट पर वास्कोडिगामा अपने शिप से उतर रहा था।

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 जापान में जब ये पेड़ उगा, तब भारत के पश्चिमी तट पर वास्कोडिगामा अपने शिप से उतर रहा था।  इस पेड़ ने साम्राज्यवाद देखा, क्रांतियां देखी, राजाओं को मिटते देखा, जनतंत्र का उभार देखा। देशों को बनते देखा, खत्म होते भी देखा।  कला देखी, तो क्रूरता का भी गवाह हुआ, विज्ञान को अंधकार से चांद की सतह तक पहुँचते देखा।  ●● 400 साल में यह बोनसाई, महज चार इंच बढ़ा। ये हरा भरा है, एकदम असल है। फूल भी आते हैं, सुंदर है, 50 हजार डॉलर का सबसे महंगा पौधा है। पर सच यही है, कि ये बोनसाई है,  याने बौना है, किसी के रहमोकरम पर है।  बोनसाई, नॉर्मल नही होता। इसे मिट्टी की थिन लेयर दी जाती है, कंट्रोल्ड पानी दिया जाता है। तारो के छल्ले से इसका विकास रोका जाता है।  अनचाही शाखें काट दी जाती हैं।  ●● बोनसाई किसी भी पौधे को बनाया जा सकता है, बशर्ते आप उसकी नैचुरल ग्रोथ का पूरा पैटर्न समझ चुके हों।   इसी तरह बोनसाई किसी समाज को, किसी व्यवस्था को, किसी देश को, उसके लोगो को भी बनाया जा सकता है।  आपको बस, शिक्षा की सीमित मिट्टी देनी है, सीमित बौद्धिक स्वतंत्रता देनी है। ...

पाइरेट्स ऑफ कैरिबियन...

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 पाइरेट्स ऑफ कैरिबियन...  मूवी याद होगी आपको, और जॉनी डेप्प का मशहूर किरदार कैप्टन जैक स्पैरो भी। आप इन पाइरेट्स को क्रिमिनल, लुटेरा और आउटलॉ मानते रहे हैं।  पर सच्चाइयां अक्सर उलट होती है।  ●● मैं बकेनियर्स की बात कर रहा हूँ। याने, "सरकारी डाकू" जिन्हें राजा की ओर से, लूट का लाइसेंस मिला होता था।  ये सोलहवीं सदी का दौर था। समुद्र, तब का नया इंटरनेट था। हाई सीज, व्यापार का हाइवे बन रहे थे। नौकायन, जहाजरानी, नेविगेशन में नई खोजें हो रही थी।  नई जमीन नए देश,नए जलमार्ग खोजे जा रहे थे। उनसे व्यापार किया जा रहा था। जहाजो में भरा माल, कमाए गए सिक्के, उनमें चप्पू चला रहे गुलाम.. ये सब मिलकर किसी भी व्यापारिक शिप को, "तैरता हुआ बटुआ" बना देते थे।  तो समुद्र में तैरता बटुआ लूटकर रातोरात अमीर होने के इच्छुक भी थे।  ●●● लेकिन समुद्री लुटेरा होना आसान न था। हाई स्किल, हाई रिसोर्स, हाई इन्वेस्टमेंट का काम था। इसके ऊपर सबसे बड़ी जरूरत थी, एक देश की, जहां आप लूट की अकूत दौलत खर्च कर पायें। बंगले बनायें, ऐश करें, बाइज्जत आजाद घूम सकें।  तो पहले तो कुछ जियाले ...

महादानवीर सम्राट कश्यप महाराजा बलि के इतिहास के कुछ साक्ष्य ● ऐसे हुई कश्यप राजा बलि की उत्पत्ति :

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 ॐ नमो निषाद अधिपति गुह्य राज निषाद महादानवीर सम्राट कश्यप महाराजा बलि के इतिहास के कुछ साक्ष्य ● ऐसे हुई कश्यप राजा बलि की उत्पत्ति :  कश्यप ऋषि की पत्नी दिति के दो प्रमुख पुत्र हिरण्यकश्यप और हिरण्याक्ष थे। हिरण्यकश्यप के 4 पुत्र थे - अनुहल्लाद, हल्लाद, भक्त प्रह्लाद और संहल्लाद। प्रह्लाद के कुल में विरोचन के पुत्र राजा बलि का जन्म हुआ। जब हिरण्यकश्यप और हिरण्याक्ष का जन्म हुआ था, तब धरती पर अंधकार छा गया था। देवी और देवताओं के साथ ही ऋषियों ने घोषणा की थी कि धरती पर अब शैतानी शक्ति का उदय हो गया है। सभी ने इसके प्रति चिंता व्यक्ति की थी। ● दक्षिण भारत  में था राजा बलि का राज्य :  कश्यप राजा बलि का राज्य संपूर्ण दक्षिण भारत में था। उन्होंने महाबलीपुरम को अपनी राजधानी बनाया था। आज भी केरल में ओणम का पर्व राजा बलि की याद में ही मनाया जाता है। राजा बली को केरल में ‘मावेली’ कहा जाता है। यह संस्कृत शब्द ‘महाबली’ का तद्भव रूप है। इसे कालांतर में ‘बलि’ लिखा गया जिसकी वर्तनी सही नहीं जान पड़ती। देश भर में कई ऐसे समुदाय हैं जो राजा बली के राज्य में प्रजाओं की सुख-समृद्धि को...

ईसाई षड्यन्त्रों के अध्येता कृष्णराव सप्रे

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 हर दिन पावन* 4 सितम्बर/जन्म-दिवस ईसाई षड्यन्त्रों के अध्येता कृष्णराव सप्रे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की योजना से कई प्रचारक शाखा कार्य के अतिरिक्त समाज जीवन के अन्य क्षेत्रों में भी काम करते हैं। ऐसा ही एक क्षेत्र वनवासियों का भी है। ईसाई मिशनरियां उन्हें आदिवासी कहकर शेष हिन्दू समाज से अलग कर देती हैं। उनके षड्यन्त्रों से कई क्षेत्रों में अलगाववादी आंदोलन भी खड़े हुए हैं। शासन का ध्यान स्वाधीनता प्राप्ति के बाद इस ओर गया।  मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रविशंकर शुक्ल को एक बार भ्रमण के दौरान जब वनवासी ईसाइयों ने काले झंडे दिखाये, तो उन्होंने मिशनरियों के षड्यन्त्रों की गहन जानकारी करने के लिए न्यायमूर्ति श्री भवानीशंकर नियोगी के नेतृत्व में ‘नियोगी आयोग’ का गठन किया। संघ ने भी उनका सहयोग करने के लिए कुछ कार्यकर्ता लगाये। इनमें से ही एक थे श्री कृष्णराव दामोदर सप्रे। कृष्णराव सप्रे का जन्म म.प्र. की संस्कारधानी जबलपुर में चार सितम्बर, 1931 को हुआ था। उनका परिवार मूलतः महाराष्ट्र का निवासी था। छात्र जीवन से ही किसी भी विषय में गहन अध्ययन उनके स्वभाव में था। संघप्रेमी परिवार होने के...

दादाराव परमार्थ

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 बात एक अगस्त, 1920 की है। लोकमान्य तिलक के देहान्त के कारण पूरा देश शोक में डूबा था। संघ  के संस्थापक डॉ. हेडगेवार जी किसी कार्य से घर से निकले। उन्होंने देखा कुछ लड़के सड़क पर गेंद खेल रहे हैं। डॉ. जी क्रोध में उबल पड़े – तिलक जी जैसे महान  नेता का देहान्त हो गया और तुम्हें खेल सूझ रहा है। सब बच्चे सहम गये। इन्हीं में एक थे गोविन्द सीताराम परमार्थ, जो आगे चलकर दादाराव परमार्थ के नाम से प्रसिद्ध हुए। दादाराव का जन्म नागपुर के इतवारी मोहल्ले में 1904 में हुआ था। उनके पिता डाक विभाग में काम करते थे। दादाराव को मां के प्यार के बदले सौतेली मां की उपेक्षा ही अधिक मिली क्योंकि जब दादाराव की आयु केवल चार वर्ष थी । उनकी मां का देहान्त हो गया जिसके कारण उनके पिताजी ने दूसरा विवाह कर लिया। था  मैट्रिक में पढ़ते समय इनका सम्पर्क क्रान्तिकारियों से हो गया। साइमन कमीशन के विरुद्ध आन्दोलन के समय पुलिस इन्हें पकड़ने आयी, पर ये फरार हो गये। पिताजी ने इन्हें परीक्षा देने के लिए पंजाब भेजा, उन्होने परीक्षा में उत्तर पुस्तिका को अंग्रेजों की आलोचना से भर दी। ऐसे में परिणाम क्या होना थ...

महान योद्धा तक्षक

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 महान योद्धा तक्षक का नाम कभी किसी विद्वानों ने आपको बताया ? *जिहाद का इलाज* *सन 711ई. की बात है। अरब के पहले मुस्लिम आक्रमणकारी मुहम्मद बिन कासिम के आतंकवादियों ने मुल्तान विजय के बाद  एक विशेष सम्प्रदाय हिन्दू के ऊपर गांवों, शहरों में भीषण रक्तपात मचाया था। हजारों स्त्रियों की छातियाँ नोच डाली गयीं । इस कारण अपनी लाज बचाने के लिए हजारों सनातनी किशोरियां अपनी शील की रक्षा के लिए कुंए- तालाब में डूब मरीं ।लगभग सभी युवाओं को या तो मार डाला गया या गुलाम बना लिया गया । भारतीय सैनिकों ने ऎसी बर्बरता पहली बार देखी थी !* एक बालक तक्षक के पिता, कासिम की सेना के साथ हुए युद्ध में वीरगति को प्राप्त हो चुके थे। लुटेरी अरब सेना जब तक्षक के गांव में पहुंची तो हाहाकार मच गया । स्त्रियों को घरों से खींच खींच कर उनकी देह लूटी जाने लगी । भय से आक्रांत तक्षक के घर में भी सब चिल्ला उठे। तक्षक और उसकी दो बहनें भय से कांप उठी थीं ।  तक्षक की माँ पूरी परिस्थिति समझ चुकी थी ! उसने कुछ देर तक अपने बच्चों को देखा और जैसे एक निर्णय पर पहुंच गयी।  माँ ने अपने तीनों बच्चों को खींच कर छाती में ...