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जून, 2022 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

दादाराव परमार्थ

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 बात एक अगस्त, 1920 की है। लोकमान्य तिलक के देहान्त के कारण पूरा देश शोक में डूबा था। संघ  के संस्थापक डॉ. हेडगेवार जी किसी कार्य से घर से निकले। उन्होंने देखा कुछ लड़के सड़क पर गेंद खेल रहे हैं। डॉ. जी क्रोध में उबल पड़े – तिलक जी जैसे महान  नेता का देहान्त हो गया और तुम्हें खेल सूझ रहा है। सब बच्चे सहम गये। इन्हीं में एक थे गोविन्द सीताराम परमार्थ, जो आगे चलकर दादाराव परमार्थ के नाम से प्रसिद्ध हुए। दादाराव का जन्म नागपुर के इतवारी मोहल्ले में 1904 में हुआ था। उनके पिता डाक विभाग में काम करते थे। दादाराव को मां के प्यार के बदले सौतेली मां की उपेक्षा ही अधिक मिली क्योंकि जब दादाराव की आयु केवल चार वर्ष थी । उनकी मां का देहान्त हो गया जिसके कारण उनके पिताजी ने दूसरा विवाह कर लिया। था  मैट्रिक में पढ़ते समय इनका सम्पर्क क्रान्तिकारियों से हो गया। साइमन कमीशन के विरुद्ध आन्दोलन के समय पुलिस इन्हें पकड़ने आयी, पर ये फरार हो गये। पिताजी ने इन्हें परीक्षा देने के लिए पंजाब भेजा, उन्होने परीक्षा में उत्तर पुस्तिका को अंग्रेजों की आलोचना से भर दी। ऐसे में परिणाम क्या होना थ...

महान योद्धा तक्षक

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 महान योद्धा तक्षक का नाम कभी किसी विद्वानों ने आपको बताया ? *जिहाद का इलाज* *सन 711ई. की बात है। अरब के पहले मुस्लिम आक्रमणकारी मुहम्मद बिन कासिम के आतंकवादियों ने मुल्तान विजय के बाद  एक विशेष सम्प्रदाय हिन्दू के ऊपर गांवों, शहरों में भीषण रक्तपात मचाया था। हजारों स्त्रियों की छातियाँ नोच डाली गयीं । इस कारण अपनी लाज बचाने के लिए हजारों सनातनी किशोरियां अपनी शील की रक्षा के लिए कुंए- तालाब में डूब मरीं ।लगभग सभी युवाओं को या तो मार डाला गया या गुलाम बना लिया गया । भारतीय सैनिकों ने ऎसी बर्बरता पहली बार देखी थी !* एक बालक तक्षक के पिता, कासिम की सेना के साथ हुए युद्ध में वीरगति को प्राप्त हो चुके थे। लुटेरी अरब सेना जब तक्षक के गांव में पहुंची तो हाहाकार मच गया । स्त्रियों को घरों से खींच खींच कर उनकी देह लूटी जाने लगी । भय से आक्रांत तक्षक के घर में भी सब चिल्ला उठे। तक्षक और उसकी दो बहनें भय से कांप उठी थीं ।  तक्षक की माँ पूरी परिस्थिति समझ चुकी थी ! उसने कुछ देर तक अपने बच्चों को देखा और जैसे एक निर्णय पर पहुंच गयी।  माँ ने अपने तीनों बच्चों को खींच कर छाती में ...